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त्योहारी मौसम के दौरान कारोबारियों में चिंता, केंद्र सरकार ने एमेजॉन और फ्लिपकार्ट को किया तलब, कैट के लोगों ने की केंद्रीय मंत्री से वार्ता

केंद्रीय मंत्री पियुष गोयल के साथ वार्ता करते कैट के प्रतिनिधि.

नयी दिल्ली : त्योहारी मौसम में कारोबारियों में चिंता हो गयी है. त्योहारी मौसम में एमेजॉन और फ्लिपकार्ट जैसे ऑनलाइन बिजनेस करने वाली कंपनियों पर नकेल कसने की तैयारी हो रही है. कंफेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रैडर्स (कैट) के लोगों ने इस संदर्भ में बुधवार को केंद्रीय केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पियुष गोयल के साथ बैठक की. इस दौरान बैठक में पीयुष गोयल को बताया गया कि सरकार की एफडीआइ नीति के विपरीत अपने व्यापार मॉडल का संचालन करने वाले इ-कॉमर्स कंपनियों के अनैतिक व्यापार मॉडल अपनाया गया है. प्रतिनिधिमंडल ने आरोप लगाया कि इ-कॉमर्स कंपनियां लागत से भी कम मूल्य, गहरी छूट, हानि वित्तपोषण और विभिन्न उत्पादों की बिक्री केवल वे कामर्स पोर्टल पर ही उपलब्ध होने जैसे बिजनेस मॉडल को चला रही हैं, जिन्हें एफडीआइ नीति के तहत अनुमति नहीं है. कैट प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व इसके राष्ट्रीय महामंत्री प्रवीन खंडेलवाल ने किया और इसमें अध्यक्ष अरविंदर खुराना, अखिल भारतीय उपभोक्ता उत्पाद वितरण महासंघ के अध्यक्ष धैर्यशील पाटिल और सोशल मीडिया के राष्ट्रीय प्रमुख सुमित अग्रवाल शामिल थे. बैठक में मंत्रालय के सचिव गुरु मोहपात्रा एवं अतिरिक्त सचिव शैलेंद्र सिंह समेत अन्य अधिकारी मौजूद थे. केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने प्रतिनिधिमंडल को धैर्यपूर्वक सुनवाई करते हुए कहा कि सरकार अपने एफडीआइ नीति को लागू करने के लिए प्रतिबद्ध है. किसी भी परिस्थिति मे लागत से भी कम मूल्य या गहरी छूट की अनुमति नहीं दी जाएगी. यहां तक कि एक स्तर की व्यापारिक प्रतिस्पर्धा का वातावरण निर्माण करने में कोई कसर नहीं छोड़ेगी है. इ-कॉमर्स में व्यापार के किसी भी डाइवर्सन की अनुमति नहीं दी जाएगी. एफडीआइ नीति में इ-कॉमर्स कंपनियों को केवल बाज़ार के रूप में काम करना होगा. कैट द्वारा उठाए गए मुद्दे के प्रभाव और महत्व को समझते हुए श्री गोयल ने सचिव डीपीअआइटी गुरु मोहपात्रा को निर्देश दिया कि वे एमेजॉन और फ्लिपकार्ट दोनों को गुरुवार को बुलाएँ ताकि कैट द्वारा उठाए गए बिंदुओं को स्पष्ट किया जा सके और एमेजॉन और फ्लिपकार्ट दोनों के साथ कैट की बैठक होनी चाहिए. मंत्रालय के अधिकारियों की उपस्थिति में मामले को सुलझाना ज़रूरी हैं. यह मुद्दा जो लंबे समय से लटका हुआ है उसे सभी के लिए एक बार सुलझाया जाना चाहिए और इ-कॉमर्स कंपनियों को न केवल कानून में बल्कि नीति की स्पिरिट में भी एफडीआइ नीति का पालन करना होगा. उन्होंने प्रतिनिधिमंडल को आश्वासन दिया कि अगर जरूरत पड़ी और अनैतिक व्यावसायिक प्रथाएं सिद्ध हो जाती हैं, तो सरकार जांच का आदेश दे सकती है. विभिन्न इ-कॉमर्स कंपनियों के संबंधित प्लेटफार्मों पर लागत से भी कम मूल्य पर माल बेचा जाना, गहरी छूट, विशिष्टता से संबंधित विभिन्न सबूतों को दर्ज करते हुए, प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि सरकार की एफडीआइ नीति की भावना और मंशा के खिलाफ, इ-कॉमर्स कंपनियां क़ीमतों को बहुत प्रभावित कर रही हैं, जो एफडीआई नीति के तहत कड़ाई से निषिद्ध है. सरकार की नाक के नीचे वर्षों से इस नीति की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं लेकिन अभी तक उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई है. ये इ-कॉमर्स कंपनियां अनैतिक व्यापार प्रथाओं द्वारा ऑफ़लाइन व्यापारियों के व्यापार को छीन रही हैं. प्रतिनिधिमंडल ने श्री गोयल से इ-कॉमर्स पोर्टल में विशेष रूप से विक्रेताओं द्वारा किए गए व्यवसाय की मात्रा और उनकी विशिष्टता का सरकारी लेखा परीक्षा शुरू करने की मांग की. यह भी मांग की कि अंतरिम उपाय के रूप में इस तरह के इ-कॉमर्स पोर्टल्स पर तत्काल प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए. कैश ऑन डिलीवरी की व्यवस्था बंद होनी चाहिए और उपभोक्ताओं द्वारा सभी भुगतान डिजिटल तरीके से किए जाने चाहिए. उपभोक्ताओं की शिकायतों को देखने के लिए एक इ-कॉमर्स लोकपाल का गठन किया जाना चाहिए. ऐसी इ-कॉमर्स कंपनियों के लिए डाटा स्थानीयकरण की शर्त को अनिवार्य किया जाना चाहिए. एफडीआइ नीति में निर्धारित नियमों और विनियमों को डीपीआइआइटी द्वारा एक अलग अधिसूचना के माध्यम से घरेलू इ-कॉमर्स कंपनियों पर भी लागू किया जाना चाहिए. लंबे समय से लंबित इ वाणिज्य नीति को जल्द से जल्द जारी किया जाना चाहिए और लागू किया जाना चाहिए ताकि भारतीय इ-वाणिज्य बाजार कुछ प्रमुख इ-कॉमर्स खिलाड़ियों की इच्छाशक्ति और सनक का शिकार न हो. प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि इ-कॉमर्स देश में व्यापार का एक आशाजनक भविष्य है, लेकिन कुछ कुप्रथाओं से काफी हद तक प्रभावित हुआ है, जिसके परिणामस्वरूप एक असमान स्तर का खेल मैदान और अनुचित प्रतिस्पर्धा पैदा हुई है, सरकार को ऐसे सभी विकृतियों को खत्म करने और इको को सक्षम करने के लिए तत्काल कदम उठाने होंगे. वाणिज्य बाजार निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा के साथ एक समान स्तर का खेल मैदान है. कैट ने कहा है कि उसने पहले ही देश के 7 करोड़ व्यापारियों को डिजिटल बनाने के लिए एक राष्ट्रव्यापी अभियान शुरू किया है और उन्हें ऑनलाइन कारोबार में लाये.

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