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JAMSHEDPUR ENVIRONMENT INITIATIVE : दोमुहानी घाट से शुरु हुआ कारवां, नदियों में पूजन सामग्री का नहीं किया गया विसर्जन, नदी के घाट किनारे गड्ढों में हुआ सामग्रियों का विसर्जन

जमशेदपुर : लौहनगरी जमशेदपुर में पर्यावरण को बचाने के लिए पर्यावरण से जुड़े संस्थानों द्वारा उठाये गये कदम का असर दिखने लगा है. खास तौर पर कल्पवृक्ष फाउंडेशन के पर्यावरण विंग जैमपॉट ग्रींस द्वारा चलाये गये अभियान की वजह से जिला प्रशासन ने भी विसर्जन के दौरान लोगों को पूजन सामग्री नदी में प्रवाहित नहीं करने की सलाह दी थी, जिस कारण लोगों ने नदी किनारे पर ही गड्ढा बनाकर विसर्जन कर दिया. जैमपॉट ग्रींस संस्था ने विजयादशमी के मौके पर दोमुहानी आदर्श विसर्जन घाट, बिष्टुपुर बेली बोधनवाला घाट और सोनारी के बालू घाट में अभियान चलाकर लोगों को प्रतिमा की सजावट व अकार्बनिक सामग्रियों को नदी में विसर्जित ना करने हेतु अपील की. जैमपॉट ग्रींस के 30 से ज्यादा स्वयंसेवियों ने विभिन्न घाटों पर उपस्थित होकर प्रतिमा विसर्जन में योगदान दिया. जैमपॉट ग्रींस द्वारा सालों पहले शुरू किये गए अभियान की तर्ज पर स्थानीय नगर निकाय जमशेदपुर अक्षेस, जुस्को व प्रशासन भी आगे आये.

जमशेदपुर अक्षेस ने जमशेदपुर के सभी विसर्जन घाटों पर पूजन सामग्रियों को घाट पर ही बनाए गए कृत्रिम तालाबो में विसर्जित करने हेतु व्यवस्था की थी. मालूम हो की संस्था की पहल पर ही सोनारी दोमुहानी घाट को आदर्श विसर्जन घाट के तौर पर जाना जाता है. विगत वर्षों में जमशेदपुर के अन्य घाटों के मुकाबले दोमुहानी घाट पर विसर्जन के बाद भी नदी की स्वच्छता बरकरार रही थी. इसी तर्ज पर शहर के विभिन्न घाटों पर प्रयास किये गए. पर्यावरण अनुकूल पूजा मनाने के अभियान आमदेर पूजो को जिला प्रशासन, जुस्को, केंद्रीय दुर्गा पुजा कमिटी, हिन्दुपीठ समेत कई संस्थाओ व स्वयंसेवियों ने सहयोग किया. वही केंद्रीय दुर्गा पुजा कमिटी के अध्यक्ष अरुण सिंह, कल्पवृक्ष फ़ाउंडेशन के निदेशक तारक नाथ दास, प्रसून उपाध्याय, अभय मौर्या, तरुण कुमार, सुदीप्ता घोष, अरविंद कुमार व अन्य का महत्वपूर्ण योगदान रहा.

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